एक
कुछ रिश्ते
अपने होकर भी
अपने नहीं होते
कुछ
पराये होकर भी
लगते हैं अपने
अपने और पराये के बीच
खड़ा आदमी
गुमसुम ढूंढ़ता रहता है
कौन है अपना
कौन है पराया?
दो
जब भी मैंने
अपनी जिंदगी के
कोरे पन्नों पर
कुछ लिखना चाहा
तो सारे शब्द
आँखों से बहकर
सारी कहानी कह गए
तीन
तुमने मुझे
सिर्फ जहर दिया है
और बदले में मैंने
समंदर भर प्यार
उड़ेल दी है तुम पर
बिना शर्त के
प्रकाशित (स्मारिका २००९ पटना)
कुछ रिश्ते
अपने होकर भी
अपने नहीं होते
कुछ
पराये होकर भी
लगते हैं अपने
अपने और पराये के बीच
खड़ा आदमी
गुमसुम ढूंढ़ता रहता है
कौन है अपना
कौन है पराया?
दो
जब भी मैंने
अपनी जिंदगी के
कोरे पन्नों पर
कुछ लिखना चाहा
तो सारे शब्द
आँखों से बहकर
सारी कहानी कह गए
तीन
तुमने मुझे
सिर्फ जहर दिया है
और बदले में मैंने
समंदर भर प्यार
उड़ेल दी है तुम पर
बिना शर्त के
प्रकाशित (स्मारिका २००९ पटना)
ok,i have read all one ....it just like touchy poem,it's not easy to explain,i am not a stone hearted person at all , the last one is absolutely amazing...so keep writing..
ReplyDeletekeep giving us a great opportunities to read quite amazing poems....bye
hi nandan can i know who ispire u to start blogging and as well as for niket singh.....i think its..
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